तुम हो सौंदर्य की परिभाषा
तेरे केश — काली रश्मियों का बहता कारवाँ,
जैसे रात ने ओढ़ ली हो चाँदनी की चादर।
तेरी आँखें — हिरणी सी नमी लिए,
हर नज़र में छुपा कोई अनकहा समंदर।
तेरे होंठ — गुलाब की पहली सुबह,
जो शब्दों से पहले ही खामोशी को चूम लें।
तेरी मुस्कान — मासूमियत की परछाई,
जैसे बचपन की हँसी फिर से लौट आए।
चेहरा तेरा — भोर की पहली किरण,
जिससे उजाला भी रौशन होना सीखे।
तेरी चाल — लहराती हवा सी नर्म,
जैसे धरती पर फिसलती कोई मीठी धुन।
तेरी आवाज़ — कोयल की पुकार सी सुरीली,
हर शब्द में मधुरता की बूँदें बरसें।
क्या कहूँ? हर कोशिश अधूरी लगती है,
क्योंकि तू केवल सुंदर नहीं, एक अहसास है।
दिल चाहता है — ठहर जाए ये पल यहीं,
बस तुझे देखूं, तुझमें खुद को जी लूं।
तेरे साथ बीतती हर घड़ी हो अमर,
और पूरी ज़िन्दगी बस तुझे समर्पित कर दूं।