"मुर्दों की दुनिया में ज़िंदा हैं जज़्बात,
भेड़िए भी अब इश्क़ में करते हैं बात।
ख़ून के तालाब में पिशाच बहकते हैं,
तेरे नाम की राहत से मगर दिल संभलते हैं।
2 से 3 बजे के बीच खुलता है ये रहस्य का द्वार,
जहाँ मौत भी इश्क़ की कसमें खाए हर बार।
मुर्दों की इस दुनिया में तेरा इंतज़ार है,
तेरे बिना ये अंधेरे भी बेकरार हैं।
तो चल, अड़ जा मेरे खत में, बन जा राहत,
तू मिले तो मुर्दों की दुनिया भी लगे जन्नत।