गुरु हरि किशन जी महाराज- आपकी उम्र पाँच वर्ष की थी। आप को औरंगजेब ने दिल्ली बुलाया। रास्ते में आप जहाँ ठहरे वहाँ पंडित लालचन्द ने आपको गीता के श्लोक पढ़ने की चुनौती दी। आपने कहा आप कोई आदमी ले आइए, हम उसी से गीता का अर्थ कहलवा देंगे। लालचन्द एक गूँगे बहरे आदमी(छज्जू झीवर) को ले आया। आपने उसके सर पर छड़ी रखी तो वह गीता ही नहीं वेद के श्लोकों की व्याख्या करने लगा। यह थी गुरू पर भगवान की कृपा। कृपा आप पर भी हो सकती है। नैशपीठ पर आयोजित इक्कीस दिवसीय रामाधुन में आप आइए और अपने बच्चों को भी भेजिए। आपका शुभेच्छु, गणेश तिवारी पीठाधीश्वर नैशपीठ।