मैं और मेरे अह्सास
चाँद और सूरज की गति से ज़ीवन विकसित हो रहा हैं l
समस्त कायनात के जिवो में वह जिंदगी को
बो रहा हैं ll
ज़ीवन को फूलने फलने के वास्ते सदियों से
बिना रूके l
अपने किरणों की बरसात से समग्र सृष्टि को
भीगो रहा हैं ll
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह