✨ ज़िंदगी की नई रोशनी ✨
सोचा था कुछ पल की मेहमान हूँ,
चंद महीनों का सफर, बस एक अरमान हूँ।
आया था बुलावा, ऐसा लगा कहीं से,
शिकायत ना गिला था अब तो किसीसे |
नज़रें उठाए देखा तो हुआ ये एहसास,
मेरा होना जरूरी है अब भी आसपास|
बस फिर मैंने ये फैसला किया ,
ज़िंदगी को फिर से जीने का हौसला लिया ।
बीमारी आई, मगर दिल नहीं हारा,
दुआओं ने थामा, बना हिम्मत का सहारा।
आज फिर खड़ी हूँ, होठों पे मुस्कान लिए,
कब तक पता नहीं, पर तैयार हूँ नयी खुशियों के लिए |
हर लम्हा हसीन है, हर सांस एक जश्न,
ज़िंदगी अब यूँ लगे, जैसे वापस आया फिरसे बचपन।
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