मेरी कहानी"
चमकती थी मैं एक नगीने की तरह,
हर लम्हा जिया खिले दिन के तरह।
हुस्न और हुनर का संगम था मेरा,
खुशियों का हर पल संग था मेरा।
ज़िंदगी ने दी थी बहारों की छाँव,
हर राह पे बिछे थे सुनहरे पड़ाव।
मुस्कान में मेरी थी जादू की बात,
हर महफ़िल में गूँजता था मेरा साथ।
फिर आई घटाएँ, घटा घिर गई,
थोड़ी उदासी हवा में भर गई।
कुछ दर्द मिले, कुछ सपने रुके,
पर हिम्मत के दीपक न मुझसे बुझे।
थोड़ा सा रुकी, फिर संभलने लगी,
खुद को नए हौसले से बदलने लगी।
रब की दुआओं ने राहें सजाई,
फिर से मेरी दुनिया में रौशनी आई।
अब और भी निखरी, और भी जवाँ,
हर मुश्किल को मैंने बना दी दवा।
बीते हुए कल की परछाई नहीं,
यह मेरी कहानी है, कोई पराई नहीं।