"अनकही सी कहानी"
एक ख्वाब, जो सिरे से टूटा था,
कभी अधूरा सा, कभी पूरा था।
कभी सर्द हवा में कांपे थे जो पल,
आज उनकी यादें भी नहीं जगीं कहीं।
मन की राहों पर थे अजनबी चेहरे,
जिन्हें पहचानने की कोशिश अब बेकार है।
हर आह, हर ख्वाहिश, फिर खो गई कहीं,
जैसे दिल की गहराई में कोई धुंध सी बसी हो।
हमनफस, हमने खुद को ढूंढा था कभी,
लेकिन दिल के नक्शे पर मंजिल कभी ना मिली।
दूर कहीं, जो बिखरी थी एक छांव,
वो भी अब बस एक धुंधली सी याद बन गई।
इश्क़ का नाम कभी जो जुबां से निकला,
वो शब्द अब चुप, जैसे दिल में दफन हो।
ज़िन्दगी की किताब के हर पन्ने पर,
एक अनकही सी कहानी अब तक लिखी नहीं गई।
राहों के मोड़ पर हम कभी रुके नहीं,
मगर आज भी उस रास्ते पर हम आए नहीं।
हमारी चाहतें कहीं आसमान में उड़ गईं,
और वो शब्द, जो कभी कहे नहीं गए।
इतिहास में अब एक नाम नहीं रहेगा,
लेकिन एक ख्वाब, जो कभी अधूरा था,
वो अनकही कहानी दिलों में हमेशा ज़िंदा रहेगी,
जैसे हवा में एक मीठी सी ख़ुशबू बसी हो।