गजल:
तुमसे पहले शब्दों ने ऐसा जादू न देखा,
दिल ने भी कभी अपना आईना साफ़ न देखा।
तुम्हारी ख़ुशबू से रूह आज तक महकी नहीं,
इससे पहले हवा ने इतना करीब न देखा।
इश्क़ तो बस एक नाम था किताबों के लिए,
सच कहूँ, तुम्हारे बिना इसे कभी न समझा।
आँखें जब भी बंद कीं, तुम्हारा चेहरा देखा,
दुनिया की भीड़ में सुकून का पता न देखा।
जो धड़कता है, वो सिर्फ़ एक दिल नहीं,
उसमें हर धड़कन में तुमने घर न देखा।
तुमसे मिलकर यकीन हुआ खुदा पे पहली बार,
वरना दुआओं ने भी कभी ऐसा असर न देखा।
क्या कहूँ, कि अब हर लफ़्ज़ तुम्हारा नाम है,
ऐसा पहले प्यार में किसी ने लिखा न देखा।