मैं कहीं गुमनाम नहीं हुई हूं..
पर मेरे मुकद्दर में शायद चुप रहना ही लिखा होगा...
पर हां यह भी सच है कि मैं किसी से डरती भी नहीं हूं
हां हूं मैं थोड़ी बदतमीज अगर
तुम अपनी तमीज जो भूल गए...
मैं वह अंगार हूं जो बिना छुए भी जला सकती हूं..
याद रखना अगर मुझ पर कीचड़ उछालोगे तो मैं तुम्हें भी बक्षुगी नहीं...