एक उम्र के बाद हमारे अंदर से हमारा वह बचपन छूट जाता है, ऐसा लोगों को लगता है ...
लेकिन ऐसा नहीं है कई दफा हमारा वह बचपना हमारे भीतर ही होता है ..
लेकिन कुछ इतने अनुभव हम कर चुके होते हैं कि हर एक बार हम दूसरों की दी हुई चोटं खाकर उससे भूल जाते हैं
कई बार हम जी नहीं पाए क्योंकि हमें ठगा जाता है हमें छला जाता है हमें छोड़ा जाता है हम पर कई अत्याचार किये जाते है और हम धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपना वह बचपन कहीं दूर छोड़ देते हैं लेकिन हम अपनें अ आप में हमारा बचपन बनाए रखना चाहिए क्या पता यह बचपन ही हमें जीने का नया सलीका सीख जाए...