मंच को सादर अर्पित-समर्पित
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उजल चमन में अरमानों को रुला दिया किसी ने,
चाँदनी रातों तीलीयों में कष धुआँ किया किसी ने।
दीवानी ख़्वाब जो आँखों में गर सजाए थे कभी,
बे सर रात के सन्नाटे जोशं जला दिया किसी ने।
खशारा़ आस छोड फूलों से जो जंगल से जोड़ा,
विर्क बेसहारा शाख़ें भी फिर तोड़ दिया किसी ने।
वादा किया था शबनमी जज्बा ए गफल का जो,
ताब ए गुरूर बीच सफ़र में छोड़ दिया किसी ने।
सबा कम सिन पलकों पे लिखे थे जो नाम उसके,
मिरा रूठ के यादों को भी गमछोड़ दिया किसी ने।
बेरूत फिरक़ का दिया जलाया था कभी बेताबसी ये
जेर रूख ए रोश्न लौ जब्र ही बुझा दिया किसी ने।
मेहरबां वतन की किताबों में नागवा जो बातें लिखीं,
बुत खाने सफ़हा यादे शिकस्त मिटा दिया किसी ने।
मुसीबत जो न हम क़सम खाई थी वफ़ा की कभी,
जिंदगानी क़सम सबा को हया भुला दिया किसी ने।
शीशागरों सपनों का एक जाल सा बुनकर आजमाईश,
या सिरत शहरशीशी क्यूं उसमें फँसा दिया किसी ने।
बज्म ए सलाम दिल के ज़ख़्मों को दबाया था जो,
तिरे दरीचे में फिर से उनको उभार दिया किसी ने।
निगाह ए यार आसमान छूने की उम्मीदें दी थीं,
मुआमला सरका जमीं पेफिर ला दिया किसी ने।
रिंद ए साकी हर मुस्कान के पीछे छिपे ग़म को,
मौज ख़ुदके दर्द से चौसर सजा दिया किसी ने।
सलाहयित जो हँसी देती थी तसल्ली कभी कभी,
खंजर खीच ख़ुशी को भी चुरा लिया किसी ने।
शम्स ए ताज हर फ़िज़ा से जो महक आती थी,
गुल ए आरजू हवा को भी सहमा दिया किसी ने।
चाहथा जहाँ में प्यार पाना बहार ए चराग किसी ने
चश्म ए ख्वाब ए तरब नफ़रत नब्जकिया किसी ने।
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प्रतिदिन आहार में संभव करे कि साबुत अनाज जिसमें जौ, ज्वार, मक्का, बाजरा, चना मूंग मोठ आदि स्थानीय बतौर उपज को अपने भोजन में रोटी दलिया और राब में स्थान देवें और उत्तम जीवन के साथ आदर्श, स्वस्थ्य और समग्र जीवन को अग्रसर सभी रहे यदि साद्र प्रार्थना-सविनय निवेदन है ।
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जुगल किशोर शर्मा, बीकानेर
मननं कुरु, चिन्तनं कुरु, कर्मभावं धारय the importance of reflection, contemplation, and maintaining the spirit of action (karma). - लोकः समस्ताः सुखिनो भवन्तु में समाहित सहज सनातन और समग्र समाज में आदरजोग सहित सप्रेम स्वरचित