माँ का एहसास...
माँ हैँ तो कहती हैँ बाबू कल से तुम्हारा call नहीं आया
माँ हैँ तो कहती हैँ बाबू कुछ बात तो नहीं हैँ, कुछ छुपा तो नहीं रही हो??
माँ हैँ तो कहती हैँ तुम खुश हो ना??
माँ हैँ तो कहती हैँ बेटा इस बार अकेले मत आना दामाद जी को भी लाना
माँ हैँ तो कहती हैँ बाबू क्यू इतना कम खा रही हो थोड़ा और लेलो
माँ हैँ तो कहती हैँ कितनी पतली होगयी हो ज्यादा खाना खाया करो, जो के हर कोई कहता हैँ, कितनी मोटी होगयी हो diet करो, पर माँ तो माँ ही होती हैँ
माँ हैँ तो कहती हैँ बाबू आज सब तुम्हारे पसंद का बना हैँ
माँ हैँ तो कहती हैँ थोड़ा तैयार हो जाया करो अच्छा लगता हैँ
माँ हैँ तो कहती हैँ बाबू इस बार अचार आम का बनाया हैँ लेजाओ, दामाद जी, बच्चों को पसंद हैँ ना
माँ हैँ तो कहती हैँ बच्चों को इतनक मत डांटा करो, क्या तुम बदमाशी नहीं करती थी
माँ हैँ तो कहती हैँ बस 1 रोटी ही दूंगी, पर लंच मे अक्सर 3 रोटियां होती थी
माँ हैँ तो कहती हैँ के इस बार आना तो कुछ और दिन के लिए आना, जल्दी मत जाना
माँ हैँ तो कहती हैँ थोड़ा दिन और नहीं रुक सकती
माँ हैँ तो कहती हैँ बाबू दिल भरा नहीं रुक जाओ
माँ हैँ तो मेरा मायका हैँ माँ आप नहीं तो कुछ भी नहीं...
❤️❤️lv u so much Ammi❤️ by sarwat fatmi❤️