Hindi Quote in Shayri by JUGAL KISHORE SHARMA

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नज़र में आ के ठहर जाए वो फ़साना कहाँ
तुम्हें भी दिल से भुला दे वो दीवाना कहाँ

गुलों की ख़ुशबू से महकते हैं राह-ए-सफ़र
मगर वो रात कि फिर आए वो ज़माना कहाँ

दिलों में हवाए लगाने से क्या मिलेगा तुम्हें
ये शो’लः-ए-इश्क़ बुझ जाए तो ठिकाना कहाँ

ख़ता भी की है इरादे से, हक़ छिपाया भी
मगर ये बात बताए दिल-ए-आशिक़ाना कहाँ

तसव्वुरात में लहरा रहे जो अश्क़ मेरे
तेरे बग़ैर ये हसरत का ख़ज़ाना कहाँ

वफ़ा के रास्ते ठहर के देख लो एक बार
किसे मिला है यहाँ सच्चा आशियाना कहाँ

नज़र की शाख़ पे बैठी जो चाह थी मेरी
गिरा है दर्द से बेज़ार वो परवाना कहाँ

नसीब अपना तो वीरानगी से यूँ भरा है
कि हर सफ़र में है वीरानी, कोई ठिकाना कहाँ

रुख़-ए-हयात को आईना-ए-ग़म में देखो
मुझे मिला भी हो वो लम्हा, पैमाना कहाँ

लबों पे थी दुआ, आँखों में थी ग़ुबार-ए-तल्ख़
मगर जो दिल में था वो इज़हार-ए-बेग़ाना कहाँ

गुज़र गए हैं जहाँ से वो कारवाँ-ए-वफ़ा
मगर अब यादों में वो चाहत का तराना कहाँ

शरार-ए-हुस्न में पिघल के जो मिट गई थी रूह
वो भी अब लौट कर आए वो बेगाना कहाँ

हवा भी ले गई अश्कों की सारी ख़ुशबू
वो जो तन्हाई में चमका वो परवाना कहाँ

अंधेरों में भी रौशनी की रहनुमा थी जो
कहाँ है वो सहर, अब वो ज़माना कहाँ

जो ख़्वाब बन के बिखर गया था हर सफ़र पे
मुझे मिला भी हो दिल का वो तराना कहाँ

वफ़ा की राह में भी काँटे ही थे नज़र आए
मुझे वो फूल भी मिला हो ये फ़साना कहाँ

मिटा दी बस्तियाँ ख़्वाबों की इन हवाओं ने
जो ग़म की आह में डूबा वो अफ़साना कहाँ

इधर जो थे मेरे दिल के तमाम ख़्वाब मगर
जयश्रीकृष्णा भी देखे तो अब मेरा ठिकाना कहाँ
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सप्रेम सहर्ष, समग्र संचय से अनुपम स्वर हेतु
स्वरचित जुगल किशोर शर्मा - बीकानेर ।

Hindi Shayri by JUGAL KISHORE SHARMA : 111950728
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