रफ्ता रफ्ता सांस सलीखे से चल रही।
हम चुभन से अकड़े और वो कहते हैं।
की जवानी निकल रही।
अब कोई हमसफर भी आए तो ?
अब कहां पहले सी रवानी है।
अब तो खामोश शबे_बारात है उस शबनम की।
अब किसे दास्तां सुनानी है ?
अब जो महफूज रहूंगा तो मर जाऊंगा।
अब तो बर्बाद ये जवानी है।
आके देखेंगे तमाशा जुगनू भी अंधेरे में।
अब कहां उन्हें रोशनी जलानी है।
बड़े दिल हैं !, और दिलदार जमाने वाले। !
धीरे से दबा हाथ,
कहते हैं , ये उसी की तो अजीज़ निशानी है ?