काश मैं लड़की ना होती तो कितना अच्छा होता,
मैं भी आजादी से घूम पाती खुशी से हंस पाती।
काश मैं लड़की ना होती कितना अच्छा होता।
ससुराल वाले कहते हैं मैं पराई हूं पराई घर से आई हूं,
मां-बाप हंसकर कह देते हैं तुझे तो पराए घर जाना है।
काश मैं लड़की ना होती तो कितना अच्छा होता।
हंसते मुस्कुराते अपनी जिंदगी जीती ,
तो कितना अच्छा होता।
मैं जोर से हंस दुं तो लोग मुझे डाट देते हैं।
उनकी आंखों में मेरे लिए सवाल होते हैं।
काश मैं लड़की ना होती तो कितना अच्छा होता।
काश मैं लड़की ना होती तो कितना अच्छा होता।