रिश्तो की अहमियत समझ ना पाए वो!
पीछे चले थे हम समझ ना पाए वो।
सोचा था कभी साथ होंगे हम!
पतझड़ पर अकेला छोड़ चल दिए!
हर शाम उसका इंतजार रहता था।
आंखों की नमी कभी समझ ना पाए वो!
माना ज़िंदगी दो चार पल है अब।
समझ कर भी ना समझते हैं वो।
अब हालातों पे छोड दिया हमने।