जहाँ जीवन है
वहीं मौत है,
इस जीवन में
स्नेह साथ है।
रिक्त पथ पर
जो बैठा है,
उसकी छवि से
मुझे प्यार है।
कहते हैं
गंगा पवित्र है,
खारे समुद्र में
वह एकत्र है।
वह मिलन भी
क्या कम है,
जो इस जीवन में
याद बहुत है।
रखी हुयी है
धरा जहाँ पर,
उसके अन्दर
स्पर्श दिव्य है।
जो प्रकाश है
वह शिकार है,
ऐसा मन में
विचार कहाँ है!
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** महेश रौतेला