दिल मेरा फिर से फिसलता जा रहा है ,
बस उसकी बातों का वो नफ़स याद आ रहा है ।
उसके ही रफाक़त ख्वाब देखता है दिल
मुझ पर उसकी सोहबत का असर आ रहा है ।
फ़िज़ा में उसकी खुशबू का कारवां चला आ रहा है ,
धड़कनो में थोड़ा असर है उसका थोड़ा सांसों में समाँ रह है ।
उसकी बातें जगाती है आरजूओं का एक जहां,
जहाँ तक देखूँ गुलपोश मुकम्मल नजर आ रहा है ।
तसव्वुर में उसके ख्यालों में हो जाता हूं मशगूल
जैसे एक बशर हक़ीक़त से दूर जा रहा है ।
मोहब्बत की कुछ ऐसी बात होती है ,
हर तरफ खुमारी का नशा छा रहा है
© pawan kumar saini