उसे पसन्द है
वो मुस्कुराता हुआ चेहरा
मुझमे वो बात कहाँ
हाँ ये सच है कि
पहले जैसे मेरे हालात कहाँ।
हाँ जिसकी खातिर ये जिन्दगी गवा दी
जिसकी खामियों को भी
उसकी खूबियाँ बता दी
हाँ माना मेरे लिए
उसके ऐसे जज्बात कहाँ
पहले जैसे मेरे हालात कहाँ।
जून की कडकती धूप हो या
दिसम्बर की थरथराती ठंड
उसके एक बुलावे पर
मेरा दौड जाना
उसकी एक झलक पाने को
मेरा यू तडप जाना
हाँ माना उसे मुझसे प्यार कहाँ
हाँ पहले जैसे मेरे हालात कहाँ। ।
मीरा सिंह