*मरने की हालत में पलंग पर पड़े पिता के पास दो भाई और एक बहन बैठे थे...*
पिता ने कहा : "मैंने जिनसे उधार लिया था, सबको चुका दिया है। जिनसे पैसे वापस लेने थे, उनसे ले भी चुका हूँ।"
* "सिर्फ एक जगह बड़ी रकम फंसी है। तुम लोग वसूल सको, तो आपस में बांट लेना..."*
तीनों संतान एक साथ बोली : "जी बाबूजी, जैसी आपकी आज्ञा।
किससे कितने पैसे लेने हैं...?"
पिताजी बोले : "पता नहीं कब मेरे प्राण निकल जाएं, इसलिए मैंने घर के नीचे वाले कमरे की अलमारी में एक खत लिख कर रखा है, मेरी मृत्यु के बाद देख लेना..."
थोड़ी देर बाद पिताजी ने अंतिम सांस ली। सब काम निपटाने के बाद बच्चों ने घर के कमरे में रखा खत निकाला, उसमे लिखा था...-
*"2014 में मोदीजी ने "15 लाख" देने का वादा किया था।*
मेरे हिस्से का मिल जाए, तो तुम तीनों पांच-पांच लाख बांट लेना...!"
*नहीं मिले तो -*
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*जब तक नहीं दे तब तक -*
*मोदीजी को छोड़ना मत !*
*"प्रधान मंत्री" बनाए रखना...!!*
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