एक छोटा सा कोई गुनाह करले जरा ।
बनी बनाई तस्वीर से तौबा कर ले जरा।।
माना के समंदर बड़ा ही तेरी ख्वाहिशों का ।
पहले स्वप्न नदी का आरंभ पहचान ले जरा ।।
गुरु , ग्रंथ और सलाह , सब पथ प्रदर्शक है।
अनुभव से अपनी नाव चलाकर देख ज़रा ।।
कही टूटा,कही बिखरा तो कही पे मर मर सा गया ।
टूटे हुए कांचों से एक आयना बना ले जरा।।
तू ही तेरा ईश्वर और तू ही तेरा दानव है दोस्त।
युग को छोड़, इसी क्षण का ख्याल कर ले जरा।।