हिम्मत नहीं है की फिर शून्य से शुरुआत करुं,
कर ली जितनी जिनसे करनी थी बातें
अब क्यों मैं फिर दिन को रात करूँ
नहीं जानना क्या तुम्हें पसंद
नहीं बताना क्या मुझे पसंद
अपने रस्ते जाओ तुम
मैं क्यों फिर तन्हा आज चलूं
क्यूं फिर वक्त अपना खराब करूं ?
हिम्मत नहीं है की फिर शून्य से शुरुआत करुं