पूर्ण प्रेम
मेरी कुछ पंक्तियाँ संभाल कर ऱखना "
अपनी किताबों के बिच जैसे
तुम्हें आदत हैं न फूल ऱखने की किताबों में
अगर हमारे ऐक'तरफे प्रेम की ज़ज़ीर टूटी नहीं
तो तुम अमृत प्रेम लिखना सदा अमर प्रेम
जिंज़ीर टूटी तो मैं मोक्ष पूर्ण प्रेम लिखूँगा....
निक राजपूत -