"कैसे हो तुम"
इस सवाल ने बहुत सताया है
पर मैंने भी इसका जवाब
हमेशा " ठीक" ही बताया है
दिल में सैलाब उठते हैं
पर एक कतरा ना बह सका,
इन मासूम आँखों ने भी
बहुत कुछ छुपाया है
कुछ रिश्ते मुक़म्मल नहीं होते...
मैंने हमेशा ये दिल को समझाया हैं
पर जब जब बात तुम्हारी आयी है,
इस दिल ने हर बार मुझे हराया है.
किसी के हिस्से में तुम
और मेरे हिस्से में बस तुम्हारी यादों का धुँधला साया है.
ये शिकवे या शिकायत नहीं हैं
अपनी कहानी में तो " तुम्हें "
खुद से बेहतर ही बताया है.....🫶📌
~unfinished_sentenc