उम्र
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जीवन की कहानी ऐसे पूरी
हो गई,
जैसे जिए हुए दिनों पर कोई
धुंध सी ठहर गई,
सफ़र की शुरुआत ऐसे हुई,
जो मिले वह खो गए,
जो मिलने को थे वह रह गये,
जो साथ आये वह छूट गए,
जो बंधन का रिश्ता लेकर
आये थे,
वे दूसरों से बांध गए,
वक्त ने जब हमको
असहाय सा पाया,
तो तन्हाइयों ने खामोशियों
का हाथ पकड़ा,
और सन्नाटों से गुपचुप
अंजुमन की,
किसकदर तड़पे हम,
इसकदर रोये हम कि,
पता नहीं चला कब ज़िंदगी
की ढलान आ गई,
गौर से सोचा तो पता चला कि,
ज़िंदगी गुजरी ही कहाँ थी,
बस उम्र पूरी हो गई.
समाप्त।
Sharovan.