वो दिखी निगाहे आधे से चेहरे के साथ मे
क्या खूब थी आँखे, नया चाँद अंधेरी रात में
दो बालो को पकड़ के वो ऐसे गाल से लटका गई
माथे पर छोटी बिंदी, मेरी आँखें भी शर्मा गई
जब देखा था मैने तो एक पलक भी ना झपकाई थी
कसम खुदा की दोनों बार नजरो से नजरें टकराई थी
अब बिन देखे आंखे वो ऐसे दिखने लगी थी
मुझको बरसो बाद आज ही किस्मत लिखने लगी थी
मुझको क्या लिखूं क्या कहूँ
वो नैन नकाशी माशाअल्लाह वो दो बाल और
बिंदी झुमका बस माशाअल्लाह
बस माशाअल्लाह माशाअल्लाह