विषय:- आत्ममंथन
कविता - 'अपनी खोज '
तू अपने अंदर झांक
बाहर मत देख
अपने आप को अंदर खोज
हो सके उतना आत्ममंथन कर।
क्या उद्देश्य है तेरा यहां आने का
तू कौन है कहां से आया
क्या लेकर जाएगा?
क्या लेकर आया?
हो सके उतना आत्ममंथन कर।
खाली हाथ आया है
खाली हाथ लौट जाएगा
जीवन का मकसद क्या है तेरा
आत्ममंथन कर।
आज तूने जो पाया है
वह गत जन्मों का पुण्य है
आने वाले जन्मों के लिए
अपने अंदर झांक,
आत्ममंथन कर।
देखना है तो अपने अवगुण देख
करना है तो सत्कर्म कर
चलना है तो सच की राह पर चल
जीना है तो औरों के लिए जी
आत्ममंथन कर ।
राग द्वेष मोह अहंकार
का त्याग कर
अपने दिल में औरों के लिए
दया करुणा प्रेम भाव रख
सत् कार्य में रुचि रख
तेरी जीवन नैया पार लगेगी
अपने आप पर भरोसा रख
आत्ममंथन कर ।
स्वरचित-डो दमयंती भट्ट
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