नारी निर्माण की कथा
भगवान जब औरत बना रहे थे तब बहुत समय लग रहा था तभी एक देवदूत ने आ कर पूछा “ आप इसे बनाने में इतना समय क्यों लगा रहे हैं ? “
भगवान मुस्कुरा कर बोले “ किसी नारी में क्या क्या विशेषताएं होनी चाहिए , क्या उसे तुम जानते हो ?
दूत बोला “ थोड़ा बहुत तो जानता हूँ , कुछ विशेष हो तो आप बताएं . “
“ पूरा डिटेल देखो तब बात करना -
उसे सभी स्थितियों में काम करना है , अपने सभी बच्चों को एक साथ गले लगाना है , उसे अपनी बीमारी खुद ठीक करनी है और रोजाना रातों की नींद हराम कर काम करना है , दुःख दर्द बर्दाश्त करना है . उसका दिल एक सागर हो जिसमें गम , ख़ुशी , अकेलापन , हँसी , रुदन , सहन , संघर्ष सभी छुपे हैं . पुरुषों की शक्ति है नारी . “
“ सिर्फ दो हाथों से इतना काम ? असम्भव , प्रभु . “ दूत ने कहा और औरत के पास जा कर छूने के बाद कहा “ यह तो बहुत कोमल है , इतना सब कैसे कर लेगी ? “
“ यही स्टैण्डर्ड मॉडल है औरत का . कोमल और मजबूत , सब कुछ झेलने लायक . “
“ ये सब तो ठीक है पर क्या यह सोच समझ सकती है ? “ दूत ने फिर पूछा
“ सिर्फ सोच ही नहीं तर्क वितर्क , भला बुरा सब सोचती है और दूर की सोचती है . “
दूत ने इस बार औरत के गालों को छू कर कहा “ प्रभु , यह तो लीक करती है . “
“ नहीं , तुम नहीं जानते हो . इसके गालों पर आंसू हैं . अपना दुःख दर्द व्यक्त करने का यही एकमात्र साधन है इसके पास . “
“ वाह , यह तो अद्भुत है . इसका अर्थ नारी परिपूर्ण ( पर्फेक्ट ) है . “ दूत ने पूछा
“ नहीं वत्स , इसमें एक कमी है . “
“ क्या ? “
“ वह स्वयं अपना मूल्य नहीं जानती है . “
दूत की आँखें आश्चर्य से खुली रह गयीं .