होठो की मुस्कान आपकी खुशहाली की नीव हैं,
निस्वार्थ प्यार का प्यासा आज हरेक जीव हैं,
प्रथम गुरु आप पिता हो जग के हो आधार,
अगर न कर पाई कार्य कोई भी तो करूंगी ,
एक ही कार्य मीरा,शबरी जैसी निश्चल भक्ति ,
देवो के देव सदाशिव राम-सिया के प्यारे आप,
जैसे शिव और सती का प्यार हुआ अमर,
सती का शिव के लिए हुआ जन्म हरबार,
एक दूसरे के बिना इनका जीवन है अधूरा,
इन दोनों के मिलने से ही संसार हैं ये पूरा,
जब मिले शिव-शक्ति अर्धनारीश्व कहलाए,
उमंग उत्साह मन में सदा रखना बेशुमार,
सारा जहाँ है जिनकी शरण में ,
नमन है उस शिव जी के चरण में,
बने उस शिवजी के चरणों की धुल ,
सबका तारणहार आया धरा पर "शिव" रूप,
होठो की मुस्कान आपकी खुशहाली की नीव हैं,
निस्वार्थ प्यार का प्यासा आज हरेक जीव हैं ।
- त्रिवेदी भूमिका