सुनो ना.....कुछ कहेना है तुमसे।
आपको लगता है की में आखिर किस की बात कर रही हूं।
में अपने दिल की बात कर रही हूं।
मुझे अपने दिल से कुछ कहेना है,
में खुदसे ज्यादा तब्बाजो किसी और को नही दे पाती।
मुझे थोड़ा नहीं पर पूरा खुद के लिए जीना है।
अब एक ही तो जिंदगी है ना मेरी जान .....
उसे तो मुझे खुद के लिए जीना है।
ना परवाह है दुनिया की रीत की,
में अपने आप में गुम हु।
ना फरक पड़ता है मुझे लोगो की सोच से,
में अपने विचारो में गुम हु।
ना कोई शिकवा गिला है मुझे किसी और से,
क्यों की में अपने आप में गुम हु।
ना हिसाब रखती हु में दुनिया का,
ना आया कभी किसी के हिसाब से बसर करने का।
क्यों की में अपने आप में गुम हूं।
छोटी छोटी खुशियां का ये खजाना मुझे अपने लिए चाहिए।
उमर भर का फसाना मुझे अपने लिए चाहिए।
मेरी खीशियो का खजाना है मेरा *संतोष* जो मुझे अपने लिए चाहिए।
क्यों की में अपने आप में गुम हु।