मैं चाहता हूँ कि...
एक दिन....
तुम याद करो मुझे...
औऱ मैं याद न आऊ तुम्हें....
कि एक दिन...
तुम देखना चाहो मुझे....
औऱ नज़र न आऊ मैं तुम्हें.....
कि एक दिन...
तुम चाहो मिलना मुझसे....
औऱ कभी न मिल पाऊ मैं तुम्हे.....
कि एक दिन...
कहना चाहो अपने मन की बात मुझसे....
औऱ कभी सुन न पाऊ मैं तुम्हें.....
हाँ मैं चाहता हूँ...
कि एक दिन....
तुम लौट के आना चाहो फिर से पास मेरे.....
औऱ तन्हा कर के चला जॉऊ मैं तुम्हें.......
कि एक दिन...
तुम अपना दर्द बहाना चाहो मेरे कंधे में.... सिर टिका कर.....
औऱ उस पल जाता दिखूँ चार कंधों में...
मैं तुम्हें....
हाँ मैं चाहता हूँ....
कि एक दिन.....
🌷🌷🌷
Akash Gupta ✍️✍️