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🥀मेरी तकलीफ को तकलीफ न समझा जाए।
आकाश, हूं मुझे रदीफ़ न समझा जाए।।🥀
🥀इश्क करने का मैं हर पल गुनाह करता हूं।
मैं हूँ मुजरिम मुझे शरीफ न समझा जाए।।🥀
🥀कतरा कतरा सना हूँ दलदल-ए-मोहब्बत में।
भूल से भी मुझे लतीफ़ न समझा जाए।।🥀
🥀जहां सदियों से रौशनी न हुई ना होगी।
वही तिमिर हूँ मुझे दीप न समझा जाए।।🥀
🥀सारी दुनिया समझती है मुझे दुश्मन अपना।
सब से कह दो मुझे शफ़ीक़ न समझा जाए।।🥀
🥀ज़र्रा - ज़र्रा मैं टूट कर बिखर चुका हूँ अब।
ख़ल्क़ में अब मुझे तौफ़ीक़ न समझा जाए।।🥀
🥀मैं तो हूँ टूटा सितारा जहां में ' '।
ऐ ज़माने! मुझे शरीफ़ न समझा जाए।।🥀
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