शीर्षक- वो मासूम लड़की मर गई
कल ज़िंदगी की सड़क पे
एक हादसा हुआ
और उस हादसे में
वो मासूम सी लड़की मर गई
ज़िंदगी के आख़िरी लम्हों में
जीने के लिए उसने
हाथ-पैर बहुत मारे
रोई, चीखी, चिल्लाई
उसकी ख़्वाहिशें, उसके ख़्वाब
सब लहू बन कर बह गए
और देखो, ज़माने की बेरहमी...।।
उसको मरता हुआ देखते रहे
और ज़िंदगी की उसकी
तस्वीर बनाते रहे और
वो मासूम लड़की
ज़िंदगी की आख़िरी लम्हों में
तमाशा बन गई और
धीरे-धीरे गहरी नींद में सो गई
फिर कभी न उठने के लिए।।
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अरे, क्या हुआ सोच में पड़ गए??
इतना भी क्या सोचना...
ज़िंदगी की सड़क पे अक्सर
ऐसे हादसे तो होते ही रहते हैं,
और हर पल, हर लम्हा कोई न कोई
मरता ही रहता है,
कभी हम अपनी गलतियों का खामियाज़ा
भुगतते हैं, तो कभी दूसरे की गलतियों की
वेदी पे चढ़ जाते हैं..
खैर हमें क्या, जो हो रहा है, होने दो,
क्या जाता है हमारा........