अभी थोड़ा और चलना है
गिर गिर के फिर संभलना है
राहों में कांटे होंगे, तय है
बीच उनके फूलों सा पलना है।
जलाएगी दुनिया की जहरीली बातें
झोंका हवा का बन निकलना है।
अंधेरे मिले हैं सब, हमारे हिस्से
रौशन चिराग बन अब जलना है।
"मन" लिए ख्वाहिशें आगे बढ़
इक ख्वाब, हकीकत में बदलना है।