तो चलिए आपको हम अपने एक तरफ इश्क की दास्तां सुनाए,
कल परसों की ही बात है,
दरअसल वो हमारे पास वाले मोहल्ले में ही रहती है,
और हुआ यूं की हमारा उनके घर जाना हुआ,
हमारे आवाज लगाने पर वो बाहर आई,
बिखड़ी हुई जुल्फें,
और उनको संभालते उनके कोमल से हाथ,
हम तो उनके चेहरे में ही खो गए,
उन्होंने आवाज भी लगाई की क्या बात है,
पर अब हम उन्हें देखते या उनके सवाल का जवाब देते,
अंत में बस खुद को संभाला,
और वहां से फिर एक बार दीदार की हसरत लिए,
अपने ठिकाने की तरफ चल पड़े......