मैं ने मौसम की तरह बदलते इंसान को देखा है
मैंने देखा है रंग बदलते हर एक इंसान को
जो शायद गिरगिट को भी पीछे छोड़ देते हैं
मैंने देखे हैं ऐसे गिरे हुए इंसानों को
जो अपने स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं
मैंने देखा है उस हर एक इंसान को जिसका कोई वजूद नहीं है
और वो सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं
पर हां मैंने सीखा है मेरे मां बाबा से
अपने उसूलों पर चलना ...... बिंदु
मैंने देखे हैं ऐसे भी कई इंसान जो
स्वाभिमान के लिए कभी झुकते नहीं
जो चाहे लाख मुसीबत आए पर रुकते नहीं
मैंने देखे हैं कई इंसान के रूप में देवता भी जो सदैव दूसरों के लिए सोचते हैं और उनकी भलाई के लिए कुछ ना कुछ करते हैं
मैं ने इस जिंदगी में देव को भी देखा है और दानव को भी
बचपन में जो कहानियां सुनी थी
वह कहानियों के किरदार को मैंने रूबरू देखा है
हां मैंने देखा है रंग बदलते इंसान को....
१०:५३ AM
०४/०६/२२