पथ्थर से भी कठिन हूँ मै
छेनी और हथौडी से तूम मुझे तोड ना पाओगे
हर बार फीर खडी हो जाऊगी
तुम मझको रोक ना पाओगे
पथ्थर पर लीखी लकीर हूं मैं
शीशे से मीटा ना पाओगे
मीट जाऊ वो मैं नहि
तुम मझको तोड ना पाओगे
सुरज शी तपन नहि मुझमे
दीपक शी मैं जलती हुं
अपना जीवन रोसन करने से
तुम मझको रोक ना पाओगे
मैं उस मीट्टी का व्रूक्ष नही
जो अांधियो मे गीर जाऐ
हालातोसे लडके मैंने
अागे बढना सीखा हैं
इस जगमे जीतने जुल्म है
उनसे लडने की ताकत है
झुठो के झुंडमे रहकर भी
सच कहनेकी आदत है
गिर गिरके फीर खडी हुई हूं
अब फिर गिरनेका शौक नही
अपने हाथोसे लीखुंगी अपना भाग्य
तूमसे मीटनेका खौफ नही.