रामायण भाग - 6
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वन वास - प्रस्थान (दोहा - छंद)
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रघुकुल रीति - नीति सदा, राजन रखना याद।
वचन पूर्ण पहले करो, बाकी बातें बाद।।
दशरथ मूर्छित हो गए, सुन रानी की बात।
तब धरती पर गिर गए, लगा ह्रदय पर घात।।
समाचार जब ये सुना, आए प्रभु श्री राम।
मात -पिता को नमन कर,कहो पिता जी काम।।
कैकयी ने बताया दिए, अपने दो वरदान।
शीश झुका श्री राम ने, वचन का रखा मान।।
सीता जी ने जब सुना, वन जाए रघुनाथ।
बोली ले जाओ साथ में, मुझको भी हे नाथ।।
लक्ष्मण जी भी दौड़ कर, गए राम के पास।
साथ मुझे भी ले चलो, मैं हूँ प्रभु का दास।।
राम लखन औ जानकी, निकले वन की ओर।
अयोध्या डूबी शोक में , मातम छाया घोर।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित