#हनुमान जी (दोहा - छंद)
**********************
राम राम रटते रहे, रहे भक्ति में चूर।
मंगल मूर्ति राम भक्त, करे अमंगल दूर।।
राम भक्त हनुमान जी, करते संकट दूर।
संकट में जब भी फसे, राम भजे जरूर।।
संकट मोचन हनुमान, करों दुखों का अंत।
दया दृष्टि हो आपकी, कष्ट हरो हनुमंत।।
जहां भजन हो राम का, वहां रहे हनुमान।
राम काज करते सदा ,जाने सकल जहान।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित