""मै असतुष्ट हूँ ! केवल अपनी आदतो से
खुद से नही |
बदलना है तो केवल आदते , बदल जाऊँ मै ,
ऐसी कच्ची जमीन नही हूँ |
समय ने एक नई समझ दी है , जैसे एक घड़े की पेंदी मे एक कील सी |"" मौलिक कविता
छोड़ दो पीछा करना उन सायों का जिन्हे प्रकाश की राह मिल गई |
जब चिल्लाकर थक जाओ तो आवाज मत दो उसे जो पीछे मुँड़कर देखना भूल गया |
जो खुश हो जहाँ उन्हे उनकी स्थिति मे खुश रहने की दुआ दो |
जीवन स्वंय के अलावा स्वंय का कोई नही रोज इस बात को भूलना ही पीड़ा का कारण है |