भक्ति - रस (दोहा - छंद)
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जमुना जी के तीर पर, खेले हैं गोपाल।
ग्वाल बाल सब साथ में, लीला करे कमाल।।
बंशी पकडे हाथ में, मधुर मधुर मुस्कान।
सुन्दर छवि श्री कृष्ण की,देखे सकल जहान।।
बंशीधर श्री कृष्ण की, लीला अपरम्पार।
बड़े बड़े ऋषि मुनि नहीं, पाए इसका पार।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित