“एक बाजार लगा मोहब्बत का, सौदेबाजी जोरो से हुई।
किसी को में मिला खरीददार अच्छा, अपनी यारी चोरों से हुई।।
हमको हमी से चुराया उसने, अपना खरीबी खास बताया उसने।
लकीरे इन हाथो से फिसल गई, वक्त बदला तो वो भी बदल गई।।
जिस दिन अलग हुए तो मर जाऊँगी, ऐसा कहा करती थी वो।
मोहब्बत ही नही हमारा गुस्सा भी सहा करती थी, परछाई बनकर साथ रहती थी वो।।
दूर जाने पर आँखों से बहती थी वो, कोई माने या ना माने शादी तो आपसे ही होगी।
सच कहूँ तो यार, कितना झूठ कहती थी वो।।”