“अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे।
क्योंकी जिसकी जितनी जरुरत थी उसने उतना ही पहचाना मुझे।।
खवाहिश नही मुझे मशहुर होने की।
आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी है।।
ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा भी कितना अजीब है।
शामें कटती नहीं, और साल गुज़रते चले जा रहे हैं....!!”– © जतिन त्यागी