कोकिल कंठी मंगेशकर
लताजी, माँ शारदा सरस्वती का वरदान थी आप, हमारे लिए;
मेरे लिए संगीत की देवी थी आप, हर सुर उतर जाता दिलमे; बडी ही पूजन्य थी
माताने आपको बनाया था अनमोल, ओ सुर-सजनी,सारि दुनियामे सिर्फ एक
भारत ने आज खोया है एक हीरा, हमेश के लिए खो गया एक अनमोल रतन
आप थी कोहिनूर से भी बहेतर, हमारी कोकिल कंठी मंगेशकर
हो गए हैं अब आप अमर, दे कर हमें सुरीला संगीत, गूंजते रहेंगे, हमारे दिलोमे सदा आपके गीत
श्रृद्धापूवक गीत आपके गाऊँगी, और सुनुगी भी मरते दम तक
दिलमे मेरे, कण कण में मेरे, बसा है आपका सुरीला संगीत
अब, मन्ना-दा, सुलु आंटी के साथ आपको भी रोज करूँगी याद
Armin Dutia Motashaw