मेरी चाय की वो प्याली अब तेरी तपिस मैं है... तेरे होथो से इलम मिल जाएंगे बस इसी ख्वाहिश मैं है...यू थोड़ा होस और थोड़ी सी मध्होसी सी है... पिकर उसे कहीं होस ना आ जाए तुझे बस इसी रंजिस में है...मिजाज तो बहुत ही आला है उसका...पर तुझसे कुछ तवज्जु की कोसिस में है...