बारिश बरस रही थी और वो छाता लेकर खड़ा था
मैं भीग रही थी और वो देख रहा था,
मेरा शरीर ठंडी के मारे ठर-ठर कांप रहा था
और वो धीरे से मुस्कुराते हुए देख रहा था,
मेरे पास आते हीं कहाँ चलिए मैं आपको आगे तक छोड़ देता हूँ
वहाँ से चलते हुए बातें और बातों में हुई नए रिश्ते की पहल।