#Deshbhakti
मैं और मेरे अह्सास
मुक्त होने के बाद देश और देशवासियों के लिए l
भगतसिंह की तरह कहाँ खनक पाए हैं हम ll
बेमतलब के वहम दिलों में पाल रखे हैं सालो से l
सुन्दर गुलदस्ता के जैसे कहाँ पनप पाए हैं हम ll
पछतर साल के बाद भी नफरतों को पनाह दी हैं l
आज भी दिलों दिमाग से कहाँ संभल पाए हैं हम ll
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह