कलम गुणगान करती है तो ललकारती भी है।
नागार्जुन ने कहा:
"कलम से काम लो गदा का, तमंचा का,
ढीला न पड़े डोर प्रत्यंचा का,
ज़हरीले सांपों पर दया नहीं करना
दुष्टों पर हमदर्दी के उसांस नहीं भरना,
कटखने कुत्तों पर रहमदिल न होना,
भलमनसाहत में जान से हाथ मत धोना"
कलम फटकारती भी है और लानत मलामत भी करती है।