शीर्षक : क्या गलत, क्या सही
कुछ दुःख, कुछ दर्द, कुछ शर्म भी जरुरी
इनके बिना जीवन की, आत्मा से होती दूरी
जीवन तो कर्मो का खेल हैं, बहुत सुनहरा
बिन संताप के जीते तो, राज बहुत गहरा
सर उठाके चलना, आजकल बहुत मुश्किल
कौन सी घड़ी, अनजाना तूफान कर दे घायल
सच और झूठ में, कोई बड़ा फासला नहीं होता
पर झूठ से पीछा छुड़ाने में, जीवन गुजर जाता
निश्चित होता जाना, पर बेखबरी में राहें भूल जाते
जब समय आता तो, अफसोस से, कदम लडखडाते
सुख,दुःख और शर्म, ये अहसास दिलाते, हम है राही
जग के रैनबसेरे में, मालूम नहीं, क्या गलत,क्या सही
✍️ कमल भंसाली
-Kamal Bhansali