आप से बढ़कर आपका विरोधी इस संसार में कोई नहीं है। आपकी विरोधी को समझने की क्षमता ही आपका ज्ञान है। जब उक्त ज्ञान आपको होने लगता है तब वह आप का ....आप से ....आरोहण करवाता है। यही सुधार... समझ एवं विकास की सर्वोत्तम प्रक्रिया है...। इसे अपनाना चाहिए...।
©डॉ. अमित दवे, खड़गदा